Rang Panchami SMS, Wishes In Hindi रंग पंचमी का त्यौहार होली के पांचवे दिन मनाया जाता हैं, इस दिन रंग, गुलाल और पानी से होली खेलते हैं . रंगों का यह त्यौहार खासतौर पर उत्तर एवम मध्य भारत में खेला जाता हैं . यहाँ की संस्कृति में इन त्यौहारों की छवि दिखाई देती हैं . उत्तरभारत में रंगों की धूम फुलेरादुज से ही शुरू हो जाती हैं जो कि रंगपंचमी तक चलती हैं . रंगों के इस त्यौहार को भी बुराई पर जीत के रूप में देखा जाता हैं और उत्साह से मनाया जाता हैं . यह जगह होली और रंगपंचमी अनूठे अंदाज में मनाई जाती हैं जैसे लट्ठ मार होली . वैसे ही मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में होली से ज्यादा रंगपंचमी का महत्त्व हैं . यहाँ यह माना जाता हैं कि होली के दिन लोग एक दुसरे से मिलते और गुलाल लगाकर बधाई देते हैं लेकिन असल होली की धूम रंगपंचमी के दिन होती हैं जब लोग पानी के रंगो से एक दुसरे के साथ इस त्यौहार को मनाते हैं . होली त्यौहार कथा लठ्ठ मार होली इतिहास

इंदौर में रंग पंचमी का अपना ही अनोखा तरीका हैं जिसमे पूरा शहर राजबाड़े पर एक साथ रंग खेलता हैं . अपने- अपने इलाकों से रंग खेलते हुए सभी राजबाड़ा पहुंचते हैं .इसे गैर कहा जाता हैं जहाँ हजारों लोग एक साथ रंग पंचमी मनाते हैं . पिचकारी की जगह टेंकर का इस्तेमाल किया जाता हैं . और खासतौर पर राज बाड़े के आस पास रहने वाले लोग अपने घरो की सुरक्षा के लिए साल भर पहले से इंतजाम रखते हैं क्यूंकि टेंकर से रंग ऊँची- ऊँची इमारतों को भी भिगो देता हैं . इंदौर की इस गैर को देखने कई लोग आते हैं .

कब मनाई जाती हैं रंगपंचमी ? (Rang Panchami 2017 Date)

यह फाल्गुन कृष्ण पक्ष की पंचमी को मनाया जाता हैं, जिसे लोग होली के पांच दिनों के बाद मनाते हैं . इसे रंगपंचमी कहा जाता हैं . रंगपंचमी देश के कुछ हिस्सों में ही मनाई जाती हैं .यह अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार फरवरी मार्च में आती हैं . इन दिनों से मौसम में गर्मी का आलम छाने लगता हैं .

इस वर्ष 2017 में रंगपंचमी 17 मार्च 2017, दिन शुक्रवार को मनाया जायेगा.

रंगो की बौछार से चेहरे पर मुस्कान आ जाती हैं
रंगो की खूबियाँ हाल-ए-दिल बयाँ कर जाती हैं
ये रंगो के त्यौहार ही तो यादों का हिस्सा हैं
जो हर साल बीते लम्हों को जवां कर जाते हैं
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रंग भरा पैगाम भेजा हैं तुम्हे,
इसे महज़ गुलाल ना समझना.
ये रंग खुशियों को बयाँ करते हैं,
इन्हें दिल की गहराईयों से कुबूल करना.
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रंग पंचमी जैसे इन्द्रधनुष का प्यार,
चारो तरफ है रंगों की बौछर.
शुभकामनाये हैं तुम्हे हमारी,
लो झेलो मेरी रंग भरी पिचकारी.

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कोई ने मारी पिचकारी,कोई ने लगाया गुलाल,
ये तो हैं रंगो का त्यौहार, हरा पीला या लाल
पर संदेश देता हैं बस खुशियों का
जम कर मनाओ त्यौहार रंगो का
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सत रंगी रंगों की लिए बरसात
है आई रंग पंचमी की सौगात
चलो चलाये मिलकर पिचकारी
न बच पाये कोई भी नर नारि
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गोकुल की गलियों में दौड़े किशन कन्हैया
गोपियाँ हैं पीछे आगे किशन कन्हैया
भर भर कर गुलाल मारे मोड़े कलाई
वृन्दावन में रंग उड़े कैसे गोपी किशन की याद ना आये
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भंग के नशे में झूमे सारी दुनियाँ
कौन मेरा कौन तेरा भूले सारी दुनियाँ
यही तो हैं मेरे देश की खूबियाँ
त्यौहारों के संग झूमे पूरी दुनियां

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रंगो से सजे सभी का द्वार
किशन कन्हैया बंसी बजाये
हो जगत उद्धार
शुभ हो रंगपंचमी का त्यौहार

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जीवन में हैं अनेक रंग
मिलते हैं जो हर तरंग
भर दे जो प्रेम के रंग
वही हैं त्यौहरो के सच्चे रंग
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रंगों के त्यौहार में नाच रहा हैं मन
आस लगाये राह तक रहा हैं मन
हे ईश्वर कर ऐसी रंगो की बौछार
खुशियाँ ही खुशियाँ हो आज मेरे द्वार
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अपनों के प्रेम में सराबोर हैं मन
सदा बना रहे यह प्रेम
बस यही हैं अभिनन्दन
हैप्पी रंगपंचमी
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तरह- तरह के रंगों का मेला
चारों तरफ हैं शौर शराबा
घरों में महके पकवानों की खुशबू
मिलेंगे पुराने यार बस यही हैं आरज़ू
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इस बार रंगों का नया हैं रंग
साथ हैं मेरी नयी नवेली दुल्हन
मनायेंगे ऐसी होली
खुश हो जायेगी घरवाली
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चलो खेले ऐसे रंग
ना कर पाये कोई भेद
मिल जाए जब दिल से दिल
तब सजे ख़ुशियाँ हर एक दिन
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ना रंगों का रहा मुझे कोई जोश
न पकवानों का कोई शोक
मुझे बुलाता हैं बस अपनों का प्यार
जब मनाते थे होली मिलकर सभी यार
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रंग पंचमी के वो दिन याद आते मुझे
जब भाई सब सताते मुझे
अब वो बचपन की होली कभी ना सजे
बस अपनों की यादे मेरे कानों में बजे
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कैसा अनूठा हैं यह त्यौहार
पहने जिसमे फटे पुराने कपड़े यार
ना हो नहाने की कोई जल्दी
आलसियों के लिए हैं सबसे अच्छी होली
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आया हैं रंगों का त्यौहार
भर रखे हैं रंग बेशुमार
बस आजाये गली में यार
तो देखना नहीं छोड़ेंगे इस बार
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बस इतना ही कहा था
तेरे साथ होली खेलने को बेक़रार हूँ
कमबख्त वो इतना सेंटी हो गई
कि टेंकर में भर रंग, मुझे फव्वारे सा उड़ा गई
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किसी को रंग लगाने की ख़ुशी तो बस दो पल रहेगी
कभी दुश्मन को गले लगाओ,खिली हुई मुस्कान सदा साथ रहेगी
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वो बचपन की होली याद बन गई
वो प्लास्टिक की पिचकारी कही गुम हो गई
अब तो यादों में ही हैं सारे अपने
त्यौहार मनाते हुए दीखते हैं सपने
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डर जाती थी मैं रंगों के गोले देख
छिप जाती थी मैं रंगों को खेलते देख
आज याद आती हैं मुझे मेरे अपनों की
जब सुनी रह जाती हैं मेरी होली
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रंगो का हैं अपना मिजाज
सुनाते हैं खुशियों का साज
त्यौहारों में हैं खास मेरी होली
दिल से दिल मिलाओ और बोलो मीठी बोली
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कान्हा खेले रंग हर एक आंगन
गोपियाँ नाचे मिले आनंद
ऐसी थी ब्रज की होली
प्यार से भरी लट्ठ मार होली
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हर होली तेरी याद आती हैं
गुलाल की बौछार में बस तू दिखती हैं
तुझे कैसे भिगौता था मैं
कैसे रहती हैं तू मेरे बगैर
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रंगों में हैं बस प्यार का संदेश
फैलाओं इसे हर देश परदेश
ना कोई हैं छोटा बड़ा
हम सब में बसा हैं देश रंगीला

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