बैसाखी पंजाब और आसपास के प्रदेशों का सबसे बड़ा त्योहार है. बैसाखी नाम वैशाख से बना है.यह एक कृषि त्योहार है, जिसमें पंजाब और हरियाणा के किसान, सर्दियों की फसल काटने के बाद नए साल की खुशियां मनाते हैं. बैसाखी के ही दिन 13 अप्रैल 1699 को दसवें सिख गुरु गोविंद सिंहजी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी.

खालसा पंथ की स्थापना का लक्ष्य था धर्म और नेकी के आदर्श के लिए सदैव तत्पर रहना. इसलिए बैसाखी का त्योहार सिखों का एक सबसे बड़ा त्योहार है. इस दिन पंजाब का परंपरागत नृत्य भांगड़ा और गिदा किया जाता है.

Happy Baisakhi 2017

Baisakhi Festival


जानिए बैसाखी मनाने के रोचक ऐतिहासिक कारण

सिखों के दसवें गुरु गोबिन्द सिंह ने बैसाखी के दिन ही आनंदपुर साहिब में वर्ष 1699 में खालसा पंथ की नींव रखी थी. इसका ‘खालसा’ खालिस शब्द से बना है, जिसका अर्थ शुद्ध, पावन या पवित्र होता है. चूंकि दशम गुरु, गुरु गोविन्द सिंह ने इसी दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी. इसलिए वैशाखी का पर्व सूर्य की तिथि के अनुसार मनाया जाने लगा. खालसा-पंथ की स्थापना के पीछे गुरु गोबिन्द सिंह का मुख्य लक्ष्य लोगों को तत्कालीन मुगल शासकों के अत्याचारों से मुक्त कर उनके धार्मिक, नैतिक और व्यावहारिक जीवन को श्रेष्ठ बनाना था.

प्रथम गुरु नानक देवजी ने भी की वैशाख माह की प्रशंसा

सिख पंथ के प्रथम गुरु नानक देवजी ने भी वैशाख माह की आध्यात्मिक साधना की दृष्टि से काफी प्रशंसा की है. इसलिए पंजाब और हरियाणा सहित कई क्षेत्रों में बैसाखी मनाने के आध्यात्मिक सहित तमाम कारण हैं. श्रद्धालु गुरुद्वारों में अरदास के लिए इकट्ठे होते हैं. दिनभर गुरु गोविंद सिंहजी और पंच-प्यारों के सम्मान में शबद और कीर्तन गाए जाते हैं.

किसान के लिए सोना समान है गेहूँ

बैसाखी पर पंजाब में गेहूँ की कटाई शुरू हो जाती है. गेहूँ को पंजाबी किसान कनक यानी सोना मानते हैं. यह फ़सल किसान के लिए सोना ही होती है, जिसमें उनकी मेहनत का रंग दिखायी देता है. यही कारण है कि चारों तरफ लोग प्रसन्न दिखलायी देते हैं और लंगर लगाये जाते हैं.